आला हजरत ने दीया था अली बिरादरान को हुक्म, अंग्रेज़ो से मुल्क को आजाद कराने के लिए बनाए तंजीम

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18 जुलाई सन् 1920 को और नौम्बर 1920 में इलाहबाद में आयोजित एक जलसे में मौलाना मोहम्मद अली जौहर, मौलाना मोहम्मद अली शौकत और तहरीके खिलाफत के दूसरे मिम्बरान ने हिन्दुस्तानी मुसलमानो को इस बात पर आमादा किया कि अंग्रेज़ी हुकूमत में रहना अब नाजायज़ है और अब हिन्दुस्तानी मुसलमानों को हिन्दुस्तान से हिजरत करके अफगानिस्तान चले जाना चाहिए।

इस सबंध में मौलाना मोहम्मद अली जौहर और मौलाना मोहम्मद अली शौकत तहरीके खिलाफत और तहरीके हिजरत की ताईद और समर्थन माँगने के लिए सन् 1920 में आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी अलैहिर्रहमा के पास सौदागरान बरेली शरीफ़ आये और दोनों भाईयों ने कहा कि ‘‘आप एक वसी हलका (एक विशाल जनसमूह) के रूहानी पेशवा हैं।

इसके साथ ही सरकारे आलाहज़रत ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर को आज़ादी ए हिन्द के संबन्ध में बहुत सी मुफीद और कार आमद बातें भी बताईं और अहम टिप्स भी दिये जिसे सुनकर मौलाना मोहम्मद अली जौहर की आँखों में आँसू आ गये और उन्होंने अक़ीदत व आस्था के साथ आलाहज़रत के हाथों को चूमा और बोसा दिया।

मगर आलाहज़रत ने अपनी रूहानी शक्ति से उनके आने के मक़सद को जान लिया था और उनके बोलने से पहले ही जो कुछ वह सोच रहे थे उसे बता दिया था। आलाहज़रत की इस करामत को देखकर अली ब्रादरान बहुत प्रभावित हुए। इसके साथ ही आलाहज़रत ने तहरीके हिजरत की पुरज़ोर मुख़ालफत की थी क्योंकि अंग्रेज़ों की ज़ालिम हुकूमत से हिन्दुस्तान को आज़ाद कराने का इलाज यह नहीं था कि हिजरत और पलायन किया जाये

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