आखिर क्यों आए थे सद्दाम हुसैन क़ुरान लेकर कोर्ट? जानिए पूरी सच्चाई

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सद्दाम साहब ने बिना किसी तमकीद के कहा, हा मुझे बहुत कुछ कहना है और जब मैं कुछ कहूँ तो मुझे अपने भाई की तरह समझो अपने इराकी भाई की तरह। और मैं यहाँ अब अपना बचाव नही करूँगा बल्कि मैं यहाँ आपका बचाव करूँगा,सारे इराकी भाइयो का बचाव करूँगा। मैं जानता हूँ आप पर अमेरिका का दबाव है लेकिन मैं आपसे फिर भी कहूँगा की आप दिल से और हिम्मत से काम लो। सद्दाम साहब सर झुका लेते है.

इतना ही नहीं सद्दाम साहब गुस्से से आग बबूला हो जाते है,और कहते है क्या अल्लाह अपनी बंदगी के लिए अदालत की कार्यवाही खत्म होने का इंतज़ार करेगा। याद करो ये इराक का कानून है की नमाज के वक़्त कोई भी सरकारी काम नही होगा,और आज ये अमेरिकी इराकी भाइयो को समझा रहे है की ये कानून सद्दाम का बनाया हुआ है,क्या तुम भूल गए की इस्लाम ही इराक का कानून है.

इनको दिवार के सहारे खड़ा कर के बंदूक के कुंडो से मारते रहे जब तक की ये बेहोश न हो गए।युसूफ को इतना मारा की इनके पैर की हड्डी बाहर निकल गयी। ये समझते है ऐसा कर के इन्होंने सद्दाम को छोटा कर दिया बल्कि ये नही जानते की सद्दाम को बहुत बड़ा कर दिया है,बहुत बड़ा। और मैं ये किसी का दिल रखने के लिए नही कह रहा हूँ बल्कि इसलिए कह रहा हूँ ताकि आप इनके कायरता का अंदाजा लगा सको।

मेरा खुदा जानता है की उस हैवानियत से जितनी तक़लीफ़ उनके अपनों को हुई उससे ज्यादा मुझे हुई। मैं बस अब यही कहूँगा की अगर मैं गुनहगार साबित हो जाऊ तो मुझे इराकी कानून के हिसाब से सजा दे दी जाये।मैं अब अपने आप को बेक़सूर साबित नही कर सकता मेरा रब मुझे इसका अज्र देगा।मुझे फख्र है की मैं 35 साल तक इराक का मुहाफिज रहा। और फिर आखिर में वही हुआ जिसकी उम्मीद सबको थी

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