क्या पाकिस्तान पर मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की एक जैसी सोच?

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नए साल शुरू होने के पहले दिन पाकिस्तान को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दिया तगड़ा झटका दिया। उन्होंने पाकिस्तान को धोखेबाज साथी बताते हुए उसकी 1628 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोक दी है। ट्रम्प के इस बयान को फॉरेन एक्सपर्ट्स एक सोची समझी स्ट्रैटजी के तौर पर ले रहे हैं। पाकिस्तान की मौजूदा हालत की बड़ी वजह भारत और अमेरिका की नजदीकियां हैं।

आइए आपको बताते हैं कि मोदी और ट्रम्प की दोस्ती के बाद कैसे इंटरनेशनल कम्युनिटी में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। ट्रम्प का पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकना इतना आसान नहीं था। इससे पहले भारत के नजदीकी रहे पूर्व यूएस प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश और बराक ओबामा भी पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा फैसला नहीं ले पाए थे। जानकार बताते हैं कि बीते साल अमेरिका में ट्रम्प के आने के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई।

इतन ही नहीं उन्होंने कई बार इलेक्शन कैम्पेन में पाकिस्तान का नाम लेकर उसके यहां आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की बात कही थी। इसके अलावा अमेरिका का ये कदम पाकिस्तान पर मोदी और ट्रम्प की एक जैसी सोच का नतीजा भी है। पीएम मोदी ने भी बीते दो सालों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की काफी खिंचाई की है, जिससे वो इंटरनेशनल कम्युनिटी में अकेला हो गया है।

फलस्तीनी राजदूत अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल हाफिज सईद की रैली में देखे गए थे। जिस पर भारत ने फलस्तीन पर कड़ा एतराज जताया था। दबाव में फलस्तीन को अपना पाकिस्तान से राजदूत वापस बुला लिया। दरअसल, भारत और फलस्तीन के रिश्ते बेहद ही अच्छे रहे हैं और फलस्तीन किसी भी कारण से दुनिया के पावरफुल नेताओं में शामिल मोदी को नाराज पहीं करना चाहता है।

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