तीन तलाक के बिल को लेकर राजयसभा में भाजपा के ये सहयोगी भी नहीं है साथ

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इस समय सोशल मीडिया पर एक तीन तलाक का मामला चर्चा का विषय बना हुआ. मोदी सरकार ने तीन तलाक को जुर्म घोषित कर इसके लिए सजा मुकर्रर करने संबंधी विधेयक को राज्यसभा में पेश किया है, लेकिन लोकसभा की तर्ज पर इसे उच्च सदन राज्यसभा में पास कराना आसान नहीं लग रहा है.

हालांकि इसमें सफलता मिलने की उम्मीद बहुत कम है. राज्यसभा में मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं है और विपक्ष अपने इस रुख पर कायम है. इसके अलावा बीजेपी के कई सहयोगी दलों की राह जुदा है. विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दल भी चाहते हैं कि इस बिल में तमाम खामियां हैं और उसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए.

सरकार ने पिछले सप्ताह तीन तलाक विरोधी बिल ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ को लोकसभा में पेश किया था. कुछ विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद ये बिल बिना किसी संशोधन के पास हो गया थ, लेकिन राज्यसभा में मुश्किलें नजर आ रही हैं. तीन तलाक विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस सहित सभी विपक्ष एकजुट नजर आए तो वहीं सत्ताधारी एनडीए में फूट नजर आई.

इतना ही नहीं विधेयक को संसदीय समिति को भेजने वालों में कांग्रेस की तरफ प्रस्तावित सदस्यों के नाम में टीडीपी का नाम है एनडीए की सहयोगी दल भी ट्रिपल तलाक के मसले पर सरकार का साथ नहीं हैं. कांग्रेस, एसपी, टीएमसी, डीएमके, एनसीपी, सीपीआई और सीपीएम सहित अन्य पार्टियों के अलावा टीडीपी ने भी इस बिल पर आपत्तियों के खिलाफ विपक्षी एकता का साथ दिया.

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