प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश को लेकर चर्चा

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हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमे आपको बतादें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश की चर्चा मीडिया में और सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से चल रही है, लेकिन बहुत कम जानकारी उपलब्ध है जिसे पुष्ट, आधिकारिक और प्रामाणिक माना जा सके. कुछ लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और उनके पास से एक चिट्ठी बरामद होने की बात कही जा रही है.

इतना ही नहीं जिससे पता चलता है कि नक्सली पीएम मोदी की हत्या करने की साज़िश रच रहे थे. इस मामले पर राजनीतिक बयानबाज़ियों का दौर जारी है, जहाँ बीजेपी और विपक्षी पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर बहुत कम जानकारी दी गई है. दिल्ली में सोमवार को पीएम पर माओवादियों के हमले की साज़िश को लेकर गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा की.

आपको बतादें कि गिरफ़्तार किए गए लोगों को ‘माओवादियों का संपर्क-सूत्र’ और उनके ‘शहरी नेटवर्क का हिस्सा’ बताया गया है और ‘उनसे निबटने के लिए’ एक योजना भी तैयार की जा रही है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, गृह सचिव और इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक के अलावा माओवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ सोमवार को लंबी बैठक की.

हालाँकि इस आयोजन में दलितों और सवर्णों के बीच टकराव हुआ था जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. वर्षगांठ का आयोजन दलितों के संगठन ‘एल्गार परिषद’ ने किया था, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति भी ली गई थी. हिंसा के बाद दो एफ़आइआर दर्ज की गईं, पुणे पुलिस से संयुक्त आयुक्त रविंद्र कदम के अनुसार ये मामले विश्रामबा पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए.

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