गौरक्षकों की हिंसा पर कंगना ने किया बीजेपी का बचाव, लिबरल्स पर उठाई उंगली

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बुधवार शाम को आध्यात्मिक संत सदगुरू से मिलने पहुंची कंगना रनौत ने गौरक्षा के नाम पर जारी हिंसा पर बीजेपी का बचाव किया है। कंगना ने कहा, ‘आप जानवरों को बचाना चाहते हैं, आप इसका विरोध करते हैं। लेकिन जब लिंचिंग होती है, तो आपको बुरा लगात है कि ये सब क्या हो रहा है। गैर कानूनी ढंग से किसी को सजा देना गलत है।’

सदगुरू से बात करते हुए कंगना ने कहा कि, ‘जब वो अपनी आने वाली फिल्म मणिकर्णिका की शूटिंग कर रही थीं, उस समय एक सीन में रानी लक्ष्मीबाई को बछड़े को बचाना था, उस समय टीम इस सोच में पड़ गई थी कि उन्हें ये सीन ड्रॉप कर देना चाहिए।’  कंगना ने बताया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, उन्होंने कहा कि हम अगर फिल्म में गाय के बच्चे को बचाते हुए दिखाते तो ऐसा लगता जैसे हम गौरक्षक हैं और झांसी की रानी भी एक गौरक्षक थी।

उन्होंने कहा कि हम देश में चल रहे इस विचारधारा का समर्थन नहीं करना चाहते थे। गाय को बचाने के नाम पर होने वाली मॉब लिचिंग पर कंगना ने कहा, आपके अंदर बुरा महसूस करते हैं विरोध करना चाहते हैं। एक जानवर को बचाने के नाम पर भीड़ द्वारा लिंचिंग की जा रही है। आपको दुख होता है ये सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर क्या है जो गलत है?

बता दें कि कंगना रनौत इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म मणिकर्णिका की शूटिंग में बिजी हैं। फिल्म में वो रानीलक्ष्मी बाई का किरदार निभा रही हैं। बता दें कि ये एक बायोपिक है। फिल्म 27 नवंबर को रिलीज हो रही है।

इस दौरान कंगना ने मोब लिंचिंग पर बीजेपी का बचाव किया। कंगना ने कहा, लिबरल कौन है? ये वो लोग हैं जो आपको तब तक अपने साथ नहीं आने देते हैं जब तक आप भी उनसे नफरत नहीं करते जिनसे वो करते हैं। अगर ये देश के भले के लिए है तो आप बीजेपी से नफरत करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। ठीक है आप सब पर यकीन कीजिए और मान लीजिए कि जो भी हो रहा है वो प्रैक्टिकली अमित शाह ही कर रहे हैं। लेकिन मुझे ये समझ नहीं आ रहा है कि आखिर जब ये सब हो रहा है तो वो लिबरल्स कहा हैं, वो क्या कर रहे हैं देश के लिए?

बता दें कि इससे पहले भी वो देश के पीएम की तारीफ कई मंचों पर कर चुकी है। हाल ही में कंगना ने कहा था, ‘’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जहां कहीं भी हैं अपने माता-पिता की वजह से नहीं बल्कि अपनी मेहनत की वजह से यहां तक पहुंचे हैं। उन्हें आने वाले पांच साल के लिए और मौका मिलना चाहिए, क्योंकि देश को गड्ढे से निकालने के लिए पांच साल काफी कम समय है।’’

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