सऊदी सरकार ने मक्का के मशहूर मुफ़्ती को किया गिरफ़्तार

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सऊदी अरब में पिछले एक साल से मुफ़्तियों पर आफ़त टूट पड़ी है। जेल में बंद सऊदी मुफ़्ती सलमान अलऔदा के बेटे अब्दुल्लाह अलऔदा ने बताया है कि मक्का के वरिष्ठ मुफ़्ती नासिर अलउमर को गिरफत़ार कर लिया गया है।

नासिर अलउमर की गिरफ़तारी पर सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर भी ज़ोरदार बसह हो रही है। कुछ उपभोक्ताओं ने कहा है कि देश संकट की स्थिति से गुज़र रहा है इन हालात में यदि शाही सरकार ने सूझबूझ से काम न लिया तो हालात और बिगड़ सकते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सऊदी सरकार विदेशी ताक़तों के इशारे पर गिरफ़तारियां कर रही है।

कुछ उपभोक्ताओं ने मुफ़्तियों की गिरफ़तारी का समर्थन करते हुए अलअरऊर, उरैफ़ी और आएज़ अलक़र्नी की गिरफ़तारी की भी मांग की है।

सऊदी अरब ने लंबे समय तक मुफ़्तियों को खुली छूट दी और इन मुफ़्तियों ने शाही अंदाज़ में जीवन गुज़ारना शुरू कर दिया लेकिन मुहम्मद बिन सलमान के अधिकार बढ़ने के बाद मुफ़्तियों पर नकेल कसी जाने लागी। वैसे इससे पहले भी मुफ़्तियों के अधिकारों में कुछ कमी की गई थी लेकिन मुहम्मद बिन सलमान ने तो मानो इन मुफ़्तियों के पर ही कतर दिए। अब केवल वही मुफ़्ती आराम से है जो शाही सरकार के हर फ़ैसले और हर नीति का समर्थन करते हैं।

हाल ही में एक मुफ़्ती शैख़ अब्दुल अज़ीज़ की एक वीडियो वायरल हुई। इस वीडियो में यह मुफ़्ती मदीने की एक मस्जिद में बैठकर भाषण दे रहे हैं कि यदि देश का बादशाह टीवी पर खुले आम शराब पिए और बलात्कार करे तब भी उसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया जा सकता बल्कि जनता का दायित्व है कि फिर भी उसका अनुसरण करे।

मगर दूसरी ओर जनता के बीच इन दरबारी मुफ़्तियों को बड़ी नफ़रत की नज़र से देखा जाता है। क्योंकि आम जनमानस में यह विचार प्रबल रूप से मौजूद है कि यह मुफ़्ती सुविधाओं और पैसे की लालच में या दंडात्मक कार्यवाही के डर से इस्लामी शिक्षाओं में फेर बदल करते हैं और शाही सरकार के अनुसरण और आज्ञापालन की रट लगाए रहते हैं।

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