हिंदुस्तानी होने बाद भी सता रहा है देश से निकाले जाने का डर

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इस समय एक खबर ये आ रही है कि भारत की पूर्वोत्तर राज्य असम में रहने वाली एक मुस्लिम महिला मरज़ीना बीबी को डर सता रहा है कि कहीं उसे राज्यहीन घोषित तो नहीं कर दिया जाएगा और उसे राज्य से बाहर तो नहीं निकाल दिया जाएगा. 26 वर्षीय मरज़ीना का नाम नागरिकों की प्रारंभिक सूची में नहीं था.

असम के फोफोंगा गांव में वह मिट्टी के घर में रहती है और बुनाई करती है. बीबी ने कहा कि “उसे लगता है कि मैं बांग्लादेशी हूं जबकि मैं भारत में ही पैदा हुई थी, मेरे माता-पिता यहीं पैदा हुए थे, मैं एक भारतीय हूं. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), जो अप्रैल 2016 के चुनाव जीतने के बाद असम में सत्ता में आई थी.

सरकार ने पड़ोसी बांग्लादेश से अवैध मुस्लिम प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अभियान शुरू किया है, लेकिन अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह अभियान मुसलमानों को भी निशाना बना रहा है जो भारतीय नागरिक हैं. भाजपा के दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

असम में 32 मिलियन से ज्यादा लोगों के अपने घर, जिनमें से एक तिहाई मुसलमान हैं. 1980 में एक देशी असमिया समूह ने राज्य के बाहर से आये लोगों के खिलाफ हिंसक विरोध किया था जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. जिसकी वजह से राज्य में बाहर से आये लोगों ने बड़े पैमाने पर नौकरियां और भूमिगत संसाधन और जमीन पर कब्ज़ा कर लिया था.

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