जब कुरान में ज़्यादा पानी खर्च करना गलत, तो कैसे हो सकती है खून बहाने की इजाज़त

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इस समय सभी मुस्लिमो को लेकर हर दम हर कोई मुस्लिमो को बदनाम करने की कोशिशे होती ही रहती है. आपको बतादे कि उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी के बयान पर विवाद शुरू हो गया है। वसीम रिजवी ने मदरसों के खिलाफ बयान देते हुआ कहा था कि मदरसों में पढ़ने वाले दहशतगर्दी की तरफ जा रहे हैं।

इतना ही नहीं वसीम रिजवी के बयान की ठाकुरद्वारा के शहर इमाम मौलाना मुहम्मद राशिद रज़ा ने मजम्मत की है। यूपीयूकेलाइव से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मदरसों का दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है, मगर कुछ लोग मदरसों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताब जिसको कुरआन मजीद कहा जाता है.

कुरआन में साफ लिखा है कि खुद भी जहन्नुम से बचो और अपने घरवालों को भी बचाओ। वसीम रिजवी का ये विवादित बयान मदरसों की इमारतों पर नहीं है बल्कि इस्लाम और कुरआन पर है और हिंदुस्तान का मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है, मगर शरियत और कुरआन पर हमला बर्दाश्त नहीं कर सकता। शहर इमाम ने कहा कि अभी लोगों ने इस्लाम और कुरआन को समझा नहीं है।

आगे उन्होंने कहा कि कुरआन मुसलमानों को फिजूल पानी बहाने की इजाजत नहीं देता तो कुरआन किसी इंसान का खून बहाने की कैसे इजाजत दे सकता है। मदरसे दीन के कारखाने हैं, जहां अच्छे इंसान तैयार किए जाते हैं। लिहाजा अपनी सियासत को चमकाने के लिए मदरसों को बदनाम न करें।