पहले मुस्लिमो के नाम पर डराओ फिर डरे हुए देशों को अपनी शरण में लो

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अन्तराष्ट्रीय मुद्दों को जानकार अखलाक़ उस्मानी साहब से, जिनकी मिडिल ईस्ट से सम्बंधित मामलों पर ना सिर्फ अच्छी पकड़ है बल्कि आगामी कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में क्या-क्या व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे, इस पर भी खुलकर चर्चा करते हुए नज़र आते है. वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया से हुई बातचीत में उन्होंने काफी मुद्दों पर चर्चा की जिसके कुछ अंश नीचे मौजूद हैं.

आपको बतादे कि इजराइल ने फिलिस्तीनियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करना 1947 से शुरू कर दिया था. इजराइल ने सिर्फ पांच सालों में फिलिस्तीन की 22,000 एकड़ ज़मीन पर अपना कब्ज़ा कर रखा है. हर रोज़ इजराइल फिलिस्तीन के एक गाँव पर कब्ज़ा करता है और फिलिस्तीनी लोगों को जबरन वेस्ट बैंक और गज़ा के एक छोटे से हिस्से में बेगुनाह लोगों को कैद करके रखा हुआ है.

इसीलिए आज पूरी दुनिया के मुसलमान फिलिस्तीन का समर्थन कर रहे है और उनके संघर्ष के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार है. इजराइल को लगता है कि वह दुनिया में किसी भी चीज़ को हासिल कर सकता है. येरुशलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने के बाद दुनिया भर के मुसलमान एकजुट होकर फिलिस्तीन का समर्थन करते देखे.

इजराइल मुस्लिम देशों की ‘एकजुटता’ को तोड़ना चाहता है, इसके लिए वह फिलिस्तीन का खात्मा करना चाहता है. अभी फिलिस्तीनियों पर और ज़ुल्म किया जाएँगे जिससे फिलिस्तीनी लोग खुद-ब-खुद राज्य छोड़ने के लिए मजबूर हो जाए. इजराइल दुनिया से फिलिस्तीन का नमो निशान खत्म करना चाहता है. फिलिस्तीनी लोग 1947 से इजराइल के साथ संघर्ष कर रहे है और फिलिस्तीन लोग अपनी सरज़मीं छोडकर किसी भी हालत में नहीं जाएंगे.