ईमानदारी की वजह से एक बार फिर चर्चा में IAS अशोक खेमका

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IAS अधिकारी और खेल महकमे के प्रमुख सचिव अशोक खेमका एक बार फिर अपने मास्टरस्ट्रोक से चर्चा में है। इस पर उन्होंने राज्य में सरकारी आयोजन पर हुए करोड़ों के खर्च का हिसाब-किताब मांगकर अफसरों को परेशान कर दिया है, जिन्होंने लंबा-चौड़ा बिल भुगतान के लिए लगाया है। खास बात है कि इस बार सरकार का भी साथ उन्हें मिला है।

आपको बतादे कि अशोक खेमका राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आए थे, जब उन्होने 2012 में रॉबर्ड वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए भूमि सौदे को रद्द कर दिया था। उस समय खेमका हरियाणा के राजस्व विभाग में थे। खेमका जिस भी विभाग में रहे, उस विभाग के मंत्री और भ्रष्ट अफसरों से कभी नहीं पटी। यही वजह रही कि उन्हें हर बार तबादले झेलने पड़े।

वहीँ मामला क्या है आपको बताते है वो जी हाँ मामला स्वर्ण जयंती समारोह के आयोजन से जुड़ा है। हर जिले को हरियाणा सरकार ने 54-54 लाख रुपये दिए थे। मगर, जिलों के उपायुक्तों ने एक से डेढ़ करोड़ रुपये के खर्च का लंबा-चौड़ा बिल-बाउचर लगाकर भुगतान के लिए सचिवालय भेजा है।

विभाग के आईएएस अफसर अशोक खेमका ने सभी जिला उपायुक्तों से साफ कह दिया है कि जितनी धनराशि खर्च के लिए तय थी, उससे एक रुपये अधिक नहीं मिलेगी। इसके लिए कोई सोर्स-सिफारिश नहीं चलेगी। जब खेमका ने भुगतान से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया तो अफसरों के चेहरे लटक गए।

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