जानिए क्या है हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब? किधर से आया ये शब्द

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हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमे आपको बतादें ये वो शब्द है जिसे आपने पिछले कुछ दिनों में टीवी पर बहस के दौरान सुना होगा, अखबार में किसी खबर के हेडलाइन में पढ़ा भी होगा. पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से कर्नाटक में सरकार गठन को लेकर सियासी उठापटक मची है, इस शब्द का उपयोग बढ़ गया है.

इतना ही नहीं हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब ‘घोड़ों की बिक्री’ से है. असल में इस शब्द की शुरुआत कैंम्ब्रिज डिक्शनरी से हुई थी. करीब 18वीं शताब्दी में इस शब्द का इस्तेमाल घोड़ों की बिक्री के दौरान व्यापारी करने लगे, लेकिन इसके साथ किस्से जुड़े कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जाने लगे.

वहीँ आपको बतादें कि 18वीं शताब्दी की शुरुआत यानी 1820 के करीब जब घोड़ों के व्यापारी अच्छी नस्ल के घोड़ों की खरीद-फरोक्त करते थे और कुछ अच्छा पाने के लिए किसी तरह के जुगाड़ या चालाकी के लिए जो तकनीक अपनाते थे, उसे ही हॉर्स ट्रेडिंग कहा गया.

हालाँकि इसके अलावा पुराने जमाने में जब भारत के व्यापारी अपने कारिंदों को अरब देश में घोड़े खरीदने के लिए भेजते थे. तो वापस आते वक्त कुछ घोड़े मर जाते थे, लेकिन अपने मालिकों को संतुष्ट करने के लिए वो घोड़ों की पूंछ दिखाकर ही गिनती पूरी कर लिया करते थे. यानी 100 घोड़े खरीदे, तो 90 दिखाए बाकी 10 की पूंछे दिखाकर कहा कि वो तो मर गए. मालिक यकीन कर लेते थे.

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