यहाँ पर 15 साल में सबसे ज़्यादा ख़राब मानसून होने के है संकेत

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हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमे आपको बतादें कि झारखंड में मानसून की निष्क्रियता से मौसम वैज्ञानिकों में निराशा बढ़ती जा रही है। गत 15 वर्षों की तुलना में यह मानसून काफी कमजोर है। जुलाई में अब तक केवल 64.9 मिलीमीटर बारिश हुई है। मानसून की यह स्थिति वर्ष 2010 से भी खराब हो सकती है।

इतना ही नहीं आपको बतादें कि 2010 में सबसे खराब मानसून रहा था और पूरे मानसून में 40 फीसदी कम बारिश हुई थी। इस बार भी मानसून बेहद कमजोर है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगे भी भी पूरे राज्य में व्यापक बारिश के आसार कम हैं। मानसून की बेरुखी से पूर्वानुमान खरे नहीं उतर रहे। मौजूदा स्थिति भी पूरी तरह से अनुकूल नहीं है।

वहीँ दूसरी और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की ऐसी बेरूखी हाल के वर्षों में नहीं देखी गई। यहां जुलाई में अच्छी बारिश होती है। इस माह राज्य में 336 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह से विपरीत है। पूर्वानुमान के विपरीत हर दिन मौसम का बदलाव जारी है।

आपको बतादें कि राज्य के सभी 24 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की जा गई है। इसमें चतरा, दुमका, गढ़वा, खूंटी, कोडरमा, पाकुड़, रांची आदि की खरा स्थिति है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई महीने में बंगाल की खाड़ी पर तीन-चार बार गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र बनते हैं। यह दबाव उत्तरी और मध्य खाड़ी के बीच बनता है। कर्क रेखा के नजदीक होने से खाड़ी के इस हिस्से पर ज्यादा गर्मी पड़ती है।

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