देश का इकलौता गांव जहां मुस्लिमों को नहीं ईद उल-जुहा मनाने की आजादी

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ईद-उल-जुहा यानि कुर्बानी का त्यौहार जिसे दुनिया भर के मुसलमान रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद हज़रत इब्राहिम और उनके पुत्र हज़रत इस्माइल अलेहीस्स्लाम की याद मनाते है। लेकीन भारत में एक ऐसा गांव भी है। जहां के मुसलमानों को इस त्यौहार को मनाने की आजादी नहीं है।

ये गांव दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में है। संत कबीर नगर जिले के मुसहारा गांव में साल 2007 से कुर्बानी पर बैन लगा हुआ है। ईद से पहले ही यूपी पुलिस मुस्लिमों के घरों से कुर्बानी के जानवरों को जब्त कर लेती है। बता दें कि एक दशक पहले गांव में एक मुद्दे को लेकर दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए थे, उसके बाद से ही यहां ये प्रतिबंध लगाए गए हैं।

साल 2007 में गांव के मुस्लिम समुदाय ने होलिका दहन एक कब्रिस्तान के नजदीक करने पर अपनी नाराजगी जतायी थी। जिसके बाद एग्रीमेंट के तहत गांव में बकरीद के मौके पर जानवरों के काटने पर और होली के मौके पर होलिका दहन पर रोक है।

धरम सिंहवा पुलिस थाने के इंचार्ज शिव बरन यादव का कहना है कि साल 2007 से हर साल हम गांव से बकरियां इकट्ठी कर उन्हें जिले के वेटरनरी डिपार्टमेंट के सुपुर्द कर देते हैं। जब त्योहार हो जाता है तो गांव वाले वेटरनरी डिपार्टमेंट से अपनी-अपनी बकरियां ले जाते हैं। इसी तरह हिंदू लोगों के होली पर अपने रीति-रिवाज करने पर भी रोक है और पुलिस हिंदुओं को होलिका दहन नहीं करने देती।

एसएचओ ने बताया कि बकरीद के तीन दिन बाद मुसलमान परिवारों को उनके बकरी वापस कर दी जाती है। ऐसे में दोनों समुदायों के लोग मिलजुकर इस त्योहार को मनाते हैं। क्षेत्र के एसपी शैलेश कुमार पांडेय का कहना है करीब एक दशक से दोनों समुदाय बकरीद इसी तरह साथ में मनाते आए हैं। अभी तक किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है।

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