पतंजलि ने एबीपी न्यूज़ से हटाए थे विज्ञापन, पुण्य प्रसून को हटाने के पीछे रामदेव ?

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देश के वरिष्ठ पत्रकारों में से एक पुण्य प्रसून बाजपेयी को एबीपी न्यूज़ पर प्रसारित होने वाले अपने शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ से हाथ धोना पड़ा है। जिसके बाद उन्होने अपनी नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया। इस मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है।जानकारी के अनुसार, रामदेव की कंपनी पतंजलि ने चैनल से अचानक अपने विज्ञापन हटा लिए थे।

चैनल के विज्ञापनों की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने द वायर  को बताया कि 15 जुलाई के आस-पास रामदेव की कंपनी पतंजलि ने अचानक चैनल से अपने विज्ञापन हटा लिए। वहीं पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने चैनल से विज्ञापन हटाने के पुष्टि की है।

हालांकि तिजारावाला का कहना है कि विज्ञापन हटाने का चैनल द्वारा मोदी सरकार की आलोचना से जुड़ी रिपोर्ट्स दिखने से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘असल में हमारा एफसीटी (फ्री कमर्शियल टाइम) शेड्यूल तो चलना ही नहीं चाहिए था क्योंकि हमारी डील तो 30 जून 2018 को ही पूरी हो गयी थी। ध्यान न देने के चलते 1-15 जुलाई तो यह ज्यादा चल गया। जैसे ही इस भूल का पता चला हमने एबीपी न्यूज़, एबीपी आनंदा और एबीपी माझा से अपना शेड्यूल वापस ले लिया।’

हालांकि तिजारावाला ने एबीपी नेटवर्क के साथ हुई इस विज्ञापन डील की कीमत बताने से मना कर दिया, लेकिन एबीपी न्यूज़ के एक अधिकारी के अनुसार यह 50-60 करोड़ रुपये के बीच थी। लेकिन इस महीने मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून बाजपेयी के इस्तीफे के बाद पतंजलि ने चैनल के साथ दोबारा विज्ञापन डील साइन की है।

तिजारावाला का कहना है, ‘आने वाले समय के लिए अभी किसी तरह की विज्ञापन डील शुरू नहीं हुई है। अगस्त के पहले हफ्ते से इसे दोबारा शुरू करने का तो सवाल ही नहीं उठता। अब तक कोई एफसीटी शेड्यूल शुरू नहीं हुआ है। हमारा मीडिया मिक्स और ब्रांड मिक्स अभी योजना के स्तर पर है।’

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि पतंजलि का चैनल से हुए इस्तीफों से कोई संबंध नहीं है और यह समूह प्रेस की आज़ादी में विश्वास करता है। उन्होंने कहा, ‘इससे हमारा कोई मतलब नहीं है। हम संपादकीय की शुचिता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान करते हैं। इस तरह का आरोप बिल्कुल बेतुका है।’

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