जानिये जेल से छूटने के बाद भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने क्यों की मौलाना मदनी से मुलाकात?

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सहारनपुर – जैसे जैसे 2019 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे वैसे बयानबाज़ी और नए घटनक्रम देखने को मिल रहे हैं. राहुल गाँधी का सॉफ्ट हिंदुत्व को बटोरने के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा हो या उसके विपरीत पीएम मोदी का मस्जिद दौरा। वैसे आपको बताते चले की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी कांग्रेस सरकार की तारीफों के पुलिंदे बांधे है. राजनीती के सियासी गलियारों में नए दाव-पेंचों से आगामी चुनावों की तैयारी में जुटे दोनों संगठनों के लिए भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद खासी परेशानी का सबब बन चुकें हैं.

गौरतलब है की दलित वोट बैंक इस वर्ष हुई घटनाओ के कारण मोदी सरकार से किनारा करने के लिए रास्ता देख रहा है वहीँ मुस्लिम वोट बैंक स्वतः कांग्रेस के खेमे में जाता प्रतीत हो रहा है. इस बार मुसलमानों को सामजवादी पार्टी तथा बसपा से ख़ासा मोहभंग नज़र आ रहा है. ऐसे में यदि कोई पार्टी इन दोनों एकमुश्त वोट बैंक को कब्ज़े में कर लेता है जो चुनावों में उसकी दमदार उपस्थिति दर्ज हो सकती है.

वोटो की भट्टी पर गर्म होते दूध की महक सभी पार्टियां सूंघ चुकी है लेकिन देखना यह होगा की मीम-भीम की यह मलाई किसकी किस्मत में आती है. शायद इसी मौके की नज़ाकत को भांपते हुए भीम आर्मी अब देश में अपना सामाजिक दायरा बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। संगठन ने अब मुस्लिम संगठनों को भी साधना शुरू कर दिया है। इस दौरान भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने मंगलवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की।

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने मंगलवार को देवबंद पहुंचकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से उनके निवास पर जाकर मुलाकात की। मदनी और चंद्रशेखर की यह मुलाकात राजनैतिक मायने मे बहुत महत्व रखती है। दोनों की मुलाकात को लेकर राजनीतिक दलों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। मदनी ओर चंद्रशेखर के बीच उनके निवास पर 20 मिनट तक बातचीत हुई। इस बातचीत को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है और इस मुलाकात को औपचारिक मुलाकात का नाम दिया जा रहा है।

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