मेरे खिलाफ झूठा मैसेज नहीं अमित शाह की साइबर फैक्ट्री से तो नहीं निकला?

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वरिष्ट पत्रकार, रवीश कुमार

पिछले कुछ दिनों से फिर से मेरे नंबर पर फोन आए जा रहे हैं। वही तरीका कि दिन रात फोन करते रहो और उठा ले तो गाली बको। तरह तरह से तंग करो। हुआ यह है कि किसी ने एक फर्ज़ी मेसेज तैयार किया है। आप जानते हैं कि व्हाट्स एप चैट में जैसी बातचीत होती है, उस तरह की बातचीत के स्क्रीन शाट फर्जी तरीके से तैयार हो जाते हैं। इस स्क्रीन शाट में फोटोशाप तरीके मुझे किसी से बात करते हुए दिखाया गए है कि संघ और बीजेपी के खिलाफ लिखो, 5000 देंगे। आई टी सेल के लोग इसे दिन रात वायरल कर रहे हैं। तरह तरह के फेसबुक पेज पर डाल रहे हैं। घूम फिर कर इनके पेज से मेसेज मुझ तक भी आ रहा है। बहुत चालाकी से उस मेसेज में मेरा नंबर डाल दिया गया है।

आई टी सेल के झांसे में बर्बाद युवाओं को पता नहीं है कि जब नेता आपका झूठ के काम में इस्तमाल करेगा, तब तो और भी आपका कुछ भला नहीं करेगा। आप हमें गाली देने के लिए अपनी स्थिति उसी पार्टी में ख़राब कर रहे हैं। लोग इतने खलिहर हो गए हैं कि बकायदा फोन कर रहे हैं। पूछ रहे हैं कि मैंने लिखा है। जब बताता हूं कि मैंने नहीं लिखा है तो बहुत से समझ भी जाते हैं। फोन काट देते हैं। मगर कुछ लोग गालियां देने लगते हैं। एक तो यह काम करता नहीं, न ही किसी को लेख के 5000 देने के पैसे हैं।

आप ज़रा ख़ुद भी दिमाग़ लगाइये, कोई ऐसे व्हाट्स एप बात करेगा कि आप संघ के ख़िलाफ़ लिखें तो 500 से 5000 रु दूंगा। बेहतर है कि आप सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे नकली मेसेज से सावधान रहें। ऐसे मेसेज का एक ही उद्देश्य होता है, कि आप किसी को फोन कर गाली दें। भीड़ बनकर किसी की हत्या कर दें। आई टी सेल के ज़रिए युवाओं को हत्यारा बनाया जा रहा है। वे हत्या कर सके इसलिए उनके दिमाग़ में झूठ भरा जा रहा है। यह धर्म की कैसी राजनीति है जो मिथ्या और कुंठा से चलती है?

मैं सोच कर कांप रहा हूं कि उत्तर प्रदेश के उन 32 लाख लोगों का क्या होगा जो अमित शाह के व्हाट्स एप नेटवर्क से जुड़े हैं। उन्हें हर दिन कितना झूठ परोसा जाता होगा। उनके दिमाग़ में झूठ का ज़हर भरते भरते क्या हाल कर दिया जाएगा। उनका दिमाग़ काम करना बंद कर देगा। एक दिन जैसा आदेश आएगा वो कर बैठेंगे। मैंने अपनी किताब THE FREE VOICE में लिखा भी है कि एक किस्म की रोबो-रिपब्लिक( ROB0-REPUBLIC) बनाने का प्रयास हो रहा है। जहां लोगों को तरह तरह के झूठ से फीड किया जाएगा जैसे एक रोबोट में होता है। फिर इस तरह के लोग ज़रा सी चिंगारी मिलते ही आग में बदल जाएंगे। किसी को मार आएंगे, शहर में अफवाह फैला देंगे। झूठा माहौल बना देंगे। मेरे ख़िलाफ़ लोगों को उकसाने के लिए जो नया मेसेज वायरल किया जा रहा है, अमित शाह के भाषण को सुनने के बाद लग रहा है कि कहीं उन्हीं की साइबर फैक्ट्री से तो ये मेसेज नहीं निकला है, जिसे वो साइबर योद्धा कहते हैं।

अमित शाह के भाषण में जब सुना कि यूपी में 32 लाख लोग इनके व्हाट्स एप नेटवर्क से जुड़े हैं तो उन घरों की चिन्ता होने लगी जिनके बच्चे इस नेटवर्क में होंगे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की राजनीतिक प्रोग्रामिंग झूठ के आधार पर कर दी गई होगी। वे व्हाट्स एप के इस झूठ से आगे देख पाने या सोच पाने के लायक नहीं बचे होंगे। ज़िंदा लाश की तरह हो चुके होंगे। अगर किसी दल के पास अफवाह फैलाने का ऐसा आफिशियल नेटवर्क हो जाए तो भारत के लोकतंत्र को कोई नहीं बचा सकता है।

ख़ुद ही अमित शाह एक प्रसंग का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि झूठे मेसेज को उनकी प्रदेश की टीम ने डाल दिया और सब जगह फैला दिया। अखिलेश और मुलायम के बारे में यह झूठा मेसेज उन तक भी पहुंचा। राजस्थान के कोटा में उन्होंने ये बात कही है। वे अपनी पार्टी के लिए साइबर योद्धा बना रहे हैं। अमित शाह का यह भाषण यू ट्यूब पर भी है। आप ख़ुद भी सुने। कितनी चालाकी से बता रहे हैं। सारा भाषण है कि झूठी बात वायरल कर दो, हमारी टीम ने किया है। बस एक लाइन डाल दिया है कि काम तो है करने जैसा मगर करना नहीं चाहिए। फिर आगे कहते हैं कि हम कुछ भी वायरल कर सकते हैं। खट्टा मिठा या सच्चा झूठा। आप नौजवानों को तय करना है, इस लोकतंत्र को गालियों के गणतंत्र में बदलकर आपको क्या मिलेगा। मैंने अमित शाह के भाषण का वो हिस्सा करीब करीब शब्दश यहां लिखा है। आप पढ़ सकते हैं।

“हमारे यहां एक लड़का था। उसने थोड़ी चालाकी कर दी। मैंने कहा न कि मेसेज ऊपर से नीचे जाएगा और नीचे से ऊपर जाएगा। मेसेज डाल दिया कि आज अखिलेश यादव ने मुलायम जी को चांटा मारा। मारा नहीं। नेता जी और अखिलेश जी 600 किमी दूर थे। मगर उसने डाल दिया। और सोशल मीडिया की प्रदेश की टीम ने सब जगह और मुझे भी डाल दिया। सब जगह फैल गया। दस बजते बजते फोन पर, मेरे मोबाइल पर फोन पर फोन भाई साहब मालूम है, अखिलेश ने पिताजी को चांटा मार दिया। जनता में एक ऐसा बेटा है जो पिता का नहीं हुआ तो हमारा क्या होगा। चल गई। ऐसा करना नहीं चाहिए मगर उसने एक प्रकार का माहौल गहरा दिया। काम तो है करने जैसा मगर करना मत। समझ में आता है। अच्छा काम भी कर सकते हैं। हम जो चाहे वो संदेश जनता के बीच पहुंचा सकते हैं। चाहे खट्टा हो या मीठा हो, सच्चा हो या झूठा।“

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं अमित शाह जिसकी देश के 90 प्रतिशत भू भाग में हुकूमत है। उस पार्टी के मुखिया झूठ और अफवाह के प्रति आग्रह रखें तो अंजाम क्या होगा, ये वो भी नहीं जानते। आपके व्हाट्स एप में आने वाला सांप्रदायिक और झूठ से लैस मेसेज आपको जानवर में बदल रहा है। सांप्रदायिकता इंसान को मानव बम में बदल देती है। झूठ की चिंगारी से वह बम फट जाता है। देश, राष्ट्रवाद, धर्म की श्रेष्ठता के नाम पर आकर्षित युवा या तो हत्यारा बन जाता है या हत्या का समर्थक। आप खुद का राजनीतिक टेस्ट कीजिए। कहीं व्हाट्स एप मेसेज और हिन्दी मीडिया के प्रोपेगैंडा ने आपको दंगाई तो नहीं बना दिया। कहीं आप हिंसा और अनुचित उग्रता का समर्थन तो नहीं कर रहे हैं। अगर जवाब हां है तो यह लेख आपके फट जाने से पहले की चेतावनी है।

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