अमेरिका की धमकियों के बाद भी ईरान से तेल खरीदता रहेगा भारत

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भारत, अमेरिका की धमकियों के बाद भी ईरान से तेल खरीदना जारी रखेगा। साथ ही ईरान और भारत के बीच आर्थिक सहयोग भी जारी रहेगा।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुरुवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और ईरान के विदेश मंंत्री जावेद जरीफ की मुलाकात हुई। बैठक के बाद जरीफ ने कहा कि भारत ने ईरान से तेल खरीदने पर प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग जारी रहेगा।

ये बैठक ऐसे वक़्त में हुई है जब अमरीका ईरान के तेल व्यापार को प्रभावित करने के लिए उसके तेल आयात पर नवंबर में कई प्रतिबंध लागू करने वाला है।  बुधवार को ही अमरीकी राष्ट्रपति ने यूएन रक्षा परिषद की बैठक में ये चेतावनी दी थी कि जो भी देश अमरीका के प्रतिबंधों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

बता दें कि ईरान ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्‍सपोर्टिंग कंट्रीज यानी ओपेक में तेल उत्‍पादन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं भारत, ईरान के लिए दूसरा ऐसा देश है जो सबसे ज्‍यादा तेल खरीदता है। भारत से पहले चीन का नंबर है।

भारत के रुख पर जरीफ ने कहा, “हमारे भारतीय मित्रों ने हमेशा ईरान से तेल खरीदने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के मामले में स्पष्ट इरादे रखे हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने मुझे ऐसा आश्वासन दिया। जरीफ ने कहा, “ईरान के भारत के साथ कई व्यापक स्तर के समझौते हैं। ऊर्जा समझौता भी इसमें एक है, क्योंकि ईरान हमेशा से भारत के लिए तेल का अहम स्रोत रहा है।” उन्होंने भारत से आगे संबंध बढ़ाने पर भी जोर दिया।

जरीफ ने कहा कि भारत और ईरान जल्द ही चाबहार बंदरगाह की क्षमता बढ़ाने पर काम करेंगे। चाबहार के जरिए भारत सीधे समुद्री मार्ग से ईरान और अफगानिस्तान से जुड़ जाएगा। कूटनीतिक तौर पर यह मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि अफगानिस्तान तक जाने के लिए भारत के पास कोई जमीनी मार्ग नहीं है।

बता दें कि 2015 की परमाणु डील रद्द होने के बाद अमेरिका ने जुलाई 2018 में ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए, जो 4 नवंबर से लागू होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि इसके बाद दुनिया का कोई भी देश ईरान से तेल नहीं खरीदेगा।

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