केरल के मुस्लिमों की आर्थिक स्थिति और साक्षरता दर बेहतर: रिपोर्ट

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अन्य राज्यों की तुलना में केरल के मुसलमानों की आर्थिक स्थिति और साक्षरता दर बेहतर है। साथ ही उनकी जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

‘‘सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस’’ की ‘‘ भारत की अल्पसंख्यक नीति और देश में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन’’ विषय पर रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल की आबादी 2001 की तुलना में 2011 में 3.18 करोड़ से बढ़कर 3.34 करोड़ दर्ज की गई जो करीब 15 लाख की वृद्धि दर्शाती है।

इसमें मुस्लिम आबादी में 10.10 लाख वृद्धि, हिन्दुओं की आबादी में 3.62 लाख और ईसाइयों की आबादी में 84 हजार की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल में मुसलमान आर्थिक रूप से समृद्ध हैं और उनकी साक्षरता दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।

राज्य में हिन्दुओं की आबादी 54.9 प्रतिशत, मुसलमानों की आबादी 26.6 प्रतिशत और ईसाइयों की आबादी 18.4 प्रतिशत है। हालांकि साल 2015 में शिशु जन्म में हिन्दुओं का योगदान 42.87 प्रतिशत, मुसलमानों का 41.5 प्रतिशत और ईसाइयों का 15.42 प्रतिशत रहा।

रिपोर्ट में 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कहा गया है कि हिन्दुओं में निरक्षरों की संख्या 36.39 प्रतिशत है जिसमें 44 प्रतिशत महिलाएं और 29.22 प्रतिशत पुरूष शामिल हैं। मुसलमानों में 42.72 प्रतिशत निरक्षर हैं जिनमें 48.1 प्रतिशत महिलाएं और 37.59 प्रतिशत पुरूष शामिल हैं।

ईसाइयों में 25.65 प्रतिशत निरक्षर हैं जिसमें 28.03 प्रतिशत महिलाएं और 23.22 प्रतिशत पुरूष शामिल हैं। सिखों में निरक्षर 32.49 प्रतिशत हैं जिसमें महिलाएं 36.71 प्रतिशत और पुरूष 28.68 प्रतिशत हैं। इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि राष्ट्र से जुड़े वृहद उद्देश्यों को हासिल करने के लिये सरकार को अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी पहल में बदलाव लाना चाहिए ताकि महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके।

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