यूपी के आठ गांवों में लगे चेतावनी भरे बोर्ड, किसानो ने बीजेपी नेताओं के प्रवेश पर लगाई पाबंदी

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दिल्ली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में यूपी के किसानों ने बीजेपी के खिलाफ मौर्चा खोलते हुए गांवों में उनके प्रवेश पर रोक लगाना शुरू कर दिया गया है। अमरोहा में आठ गावों में किसानों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं की एंट्री को बैन कर दिया है।

रसूलपुर माफी से शुरू हुआ ये सिलसिला गालिब बड़ा, छज्जापुर माफी, बाखरपुर माफी, अम्हेड़ा और रामपुर जुन्नारदार आदि गांवों में पहुँच चुका है। इन गांवों में बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर लिखा गया है- ”किसान एकता जिंदाबाद। बीजेपी वालों का इस गांव में आना सख्त मना है। जान, माल की स्वयं रक्षा करें।”

इन बोर्ड्स को लेकर प्रशासन का भी सुस्त रवैया देखा जा रहा है। कुछ एक गावों में बोर्ड्स को रात में पुलिस के द्वारा पुतवाने या हटाने की कोशिश की गई लेकिन नतीजा सिफर कर रहा। गांव के किसान धर्मपाल सिंह का कहना है कि बीजेपी ने उन्हें छला है। रात में बोर्ड हटाने पहुंची पुलिस का गांववालों ने विरोध किया। हालांकि, बाद में बोर्ड से बीजेपी के खिलाफ लिखी बातों को दूसरे कलर से पोत दिया गया। हालांकि किसान अब बदले में बीजेपी से जुड़ी चीजों को नुकसान पहुंचा रहे है।

बागपत लोकसभा क्षेत्र में आने वाली मेरठ जिले की सिवाल खास विधानसभा क्षेत्र के जानी इलाके में अनरावली मार्ग से जौहडी गांव तक सड़क निर्माण पिछले वित्तीय वर्ष में हुआ था। बीजेपी विधायक जितेंद्र सतवाई के प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री बागपत के सांसद सत्यापाल सिंह ने शुभारंभ किया था। इस उदघाटन के शिलापट को तोड़ दिया गया।

इसी तरह सिवाल खास में बीजेपी विधायक की तरफ से ही कराए गए विकास कार्य के लिए लगाए गए दूसरे शिलापट को पहले हटाया और बाद में उसके पिलर को भी तोड़ दिया गया। माना जा रहा है कि यह भी किसानों ने ही किया है।

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