हाईकोर्ट का गुजरात सरकार से सवाल – सिर्फ हिंदू धर्मस्थलों को ही क्यों दिया पैसा?

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अहमदाबाद: गुजरात में राज्य सरकार की ओर से सिर्फ हिन्दू धर्म के तीर्थ स्थलों को ही पवित्र तीर्थस्थल बताए जाने के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। जिसमे पवित्र यात्राधाम के स्थलों में सिर्फ हिन्दू धर्म के धर्मस्थलों को शामिल करने को लेकर सवाल उठाया गया है।

मुजाहिद नफीस की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि  सिर्फ हिन्दू धर्म के स्थलों को शामिल करना असंवैधानिक है, क्योंकि प्रत्येक सरकार संविधान के तहत धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए, लेकिन गुजरात सरकार ने पवित्र यात्राधाम में हिन्दू धर्म के अलावा अन्य धर्मों मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी, बौद्ध सहित अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों को शामिल नहीं किया गया है। इसलिए राज्य के अन्य धर्मों के स्थलों को भी पवित्र यात्राधाम के रूप में शामिल कर वहां आने वाले श्रद्धालुओं के रहने और अन्य व्यवस्था किए जाने का निर्देश दिया जाए।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा केवल हिंदू धार्मिक स्थानों पर किए गए खर्च, बोर्ड के नियमों के खिलाफ है। इसका उद्देश्य धार्मिक स्थानों पर तीर्थयात्रियों के लिए आवास और अन्य सुविधाएं बनाना है। सिर्फ मंदिरों के रखरखाव के लिए नहीं है।

इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर क्यों ‘गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड’ के जरिए हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास के लिए ही पैसा दिया गया? हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस वीएम पंचौली की बेंच ने सरकार के वकील से ये सवाल किया है।

बता दें कि गुजरात पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड का गठन साल 1995 में किया गया था। इसके गठन के दो साल बाद अंबाजी मंदिर, डाकोर मंदिर, गिरनार मंदिर, पालीताना मंदिर के अलावा सोमनाथ और द्वारका मंदिर को ‘पवित्र यात्राधाम’ घोषित कर दिया गया था। इसके बाद यह संख्या बढक़र 358 पहुंच चुकी है।

इस लिस्ट में किसी गैर हिंदू धार्मिक स्थल को शामिल नहीं किया गया। इसके सरकार के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर सवाल खड़े हो गए हैं। संविधान ने सभी धर्मों को एक समान बताया है, तब राज्य सरकार का यह कदम संविधान के विपरीत है।

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