सिंधु जल समझौते के तहत पाक को मिलने वाला पानी रोकेगा भारत: गडकरी

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बागपत.  पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा छीन लिया था। फिर वहां से वाले सामान पर ड्यूटी 200% तक बढ़ा दी थी। सरकार का अगला कदम पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों के पानी रोकने का है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भारत के अधिकार वाली तीनों नदियों का पानी पाकिस्तान के बजाय यमुना में लाने की बात कही है। गडकरी ने कहा कि पाकिस्तान जाने वाली तीन नदियों के पानी को यमुना में लाया जाएगा। इसके लिए तीन प्रोजेक्ट तैयार किए जा चुके हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली -आगरा से इटावा तक जलमार्ग की डीपीआर तैयार हो चूका है। इसके प्रोजेक्ट के तहत बागपत में रिवर पोर्ट बनाया जाएगा। किसानों को होने वाली पानी की समस्या दूर होगी और कई किस्म की फसलें किसान तैयार कर सकेंगे। गन्ने की खेती और चीनी मिलों को भी इससे फायदा होगा।

गडकरी ने कहा कि हम जलमार्ग पर भी काम कर रहे हैं। पानी की कमी न रहे इसलिए भारत के अधिकार वाली तीनों नदियों का पानी जो पाकिस्तान जाता है, उसे मोड़कर यमुना में लाया जाएगा। इससे हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग दिल्ली से आगरा जलमार्ग से जा सकेंगे।

क्‍या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्‍तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि हुई थी। भारत की ओर से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अयूब खान ने इस पर हस्‍ताक्षर किए थे। दोनों देशों के बीच यह संधि विश्‍व बैंक के हस्‍तक्षेप से हुई थी। इसके तहत सिंधु नदी घाटी की 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी दो हिस्सों में बांटा गया। इसके मुताबिक, रावी, ब्यास और सतलुज पर पूरी तरह से भारत और झेलम, चिनाब और सिंधु पर पाकिस्तान का हक होगा।

समझौते के तहत भारत को बिजली बनाने और कृषि कार्यों के लिए पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल के भी कुछ सीमित अधिकार दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद होने और आपसी विचार-विमर्श के बाद भी इसका निपटारा नहीं होने कीस्थिति में किसी तटस्‍थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान किया गया है।

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