‘दक्षिणपंथियों’ एक खास धर्म से नफरत ने तुम्हारा भविष्य अंधकारमय बना दिया

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मैंने एक भी पोस्ट नहीं की जिसमे मैंने कोई शोक जताया हो न्यूज़ीलैंड की घटना का.. ज़ाहिर है अफ़सोस तो होता ही है, दुःख भी होता है.. मगर दूसरे देश की बात है इसलिए मैं वैसे भी उतना कनेक्ट नहीं कर पाता हूँ.. ख़ासकर ऐसे तो बिल्कुल भी कनेक्ट नहीं कर पाता हूँ कि “मरने वाले उसी धर्म के थे जिसमें मैं पैदा हुआ”.. ये एक धर्म एक समाज का होना मुझे कभी किस से कनेक्ट नहीं कर पाता है क्यूंकि मैं वैसे भी मिसफ़िट हूँ। इस दुनिया में.. मैं क़बीलाई संस्था में यक़ीन नहीं करता हूँ इसलिए मैं किसी क़बीले से ख़ुद को कभी कनेक्ट नहीं कर पाता हूँ

ये न्यूज़ मेरे लिए बस न्यूज़ थी.. मगर ये न्यूज़ तब मेरे लिए ख़ास बन गयी जब मैंने भारत के निन्नानबे प्रतिशत दक्षिणपंथियों को खुशियां मनाते देखा.. आप बीबीसी से लेकर किसी भी न्यूज़ पेपर की ऑनलाइन साइट देख लीजिए, लगभग सौ प्रतिशत भारतीय आपको वहां खुशियां मनाते मिलेंगे.. वो मुट्ठी भर भारतीय हैं जो ऑनलाइन साइट्स पर कमेंट करते हैं, या फिर फिर वो दक्षिणपंथी हैं, या फिर वो कट्टर हैं, या फिर वो कौन हैं मुझे नहीं पता.. मगर हर न्यूज़ पेपर की साइट, फ़ेसबुक पोस्ट और ऐसी किसी भी न्यूज़ीलैंड की पोस्ट पर आपको लगभग सौ प्रतिशत भारतीय खुशियां मनातें मिलेंगे

अब ये मुझे नहीं पता कि ये भाजपा की आईटी सेल है जिसने इतनी बुरी तरह से हर जगह कब्ज़ा कर रखा है या अब लगभग सारे भारतीयों को आईटी सेल ने अपने जैसा बना दिया है.. ये जो कुछ भी है.. इसने मुझे इस तरह से लिखने को मजबूर कर दिया.. क्यूंकि ये शर्म की बात है कि मेरे आसपास रहने वाले ऐसे सोच के हैं?? सोच कर ही घिन आ जाती है

पुलवामा अटैक पर मैंने बहुत ध्यान से बहुत सारी प्रोफाइल की जांच की थी जो ख़ुशी मना रहे थे.. उनमे से लगभग सारे या तो कश्मीरी थे या पाकिस्तानी.. कश्मीर को छोड़कर भारत के सिर्फ एक या दो लोगों के उल्टे सीधे कमेंट आये थे जिन्हें स्थानीय पुलिस ने तुरंत गिरफ़्तार भी कर लिया था.. एक लड़का जो कि कश्मीरी था और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय था उसे अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ने तुरंत यूनिवर्सिटी से निकाल दिया था.. भारत के भीतर कहीं कोई ख़ुश नहीं था मगर दक्षिणपंथी कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे आम भारतीय मुसलमानों को गाली देने में और लगभग हर शहर में ऐसे जुलूस निकाले जा रहे थे जिसमें धर्म विशेष के लोगों की टारगेट कर के गालियां दी जा रही थीं.. ये सब कुछ बिना किसी खास वजह के आक्रामक तरीके से किया जा रहा था.. मगर फिर भी कहीं भी कोई भी विरोध नहीं हुआ

न्यूज़ईलैंड अटैक पर आप बस न्यूज़ की वेबसाइट्स चेक कर लीजिए.. इक्के दुक्के दुख मनाते मिलेंगे वरना हर कोई भारतीय ख़ुशी ही मनाता मिलेगा.. अब हर कोई भारतीय इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि जितने साइट्स पर कमेंट कर रहे हैं मैं उनकी बात कर रहा हूँ.. वो कौन लोग हैं, किस संगठन से हैं, किस धर्म से हैं, किस जाति से हैं, ये आप जाने.. मेरे लिए भारतीय हैं बस

मेरी पिछली कुछ पोस्ट उन्हीं लोगों के लिए थी.. ज़ाहिर है जो दुखी है उसको क्या कहना..मैं कोई पैमाना लेकर भी नहीं बैठा हूँ कि “आओ तुम्हारा दुख नापूं, कितने मिलीलीटर दुःख है तुम्हें”.. मैं क्षुब्ध सिर्फ़ उनको लेकर हूँ जो खुशियां मना रहे हैं.. वो इक्के दुक्के होते तो भी मुझे कुछ न होता.. ये मामला बहुसंख्या में है.. इसलिए इसपर बोलना और लिखना ज़रूरी है

जिन लोगों ने आपको ये सिखाया कि “एक खास धर्म के सारे लोगों से नफ़रत करो” वो आपको कभी ये नहीं एहसास होने देते हैं कि उन्हीने आपको कहाँ से कहाँ पहुंचा दिया है.. कल से इमाम तौहीदी, तारिक़ फ़तेह समेत तमाम इस्लामिक कट्टरता विरोधियों ने फ़ेसबुक पर पोस्ट लिख कर और लाइव आ कर दक्षिणपंथियों को लताड़ा है और ख़ासकर भारतीयों को अपनी वाल से बाहर निकलने की और ब्लोक करने की धमकी दी है क्यूंकि दुनिया के सारे इस्लाम के आलोचकों को सबसे ज़्यादा दक्षिणपंथी भारतीय ही फॉलो करते हैं और दक्षिणपंथी भारतीय समझते हैं कि जैसी नफ़रत उनके संगठनों ने उन्हें दिन रात व्हाट्सएप्प पर सिखाई है वैसी ही नफ़रत दुनिया के सारे इस्लाम के आलोचक आम मुसलमानों से करते हैं.. भारतीय दक्षिणपंथी यहीं चूक जाते हैं

आंख खोलिए और रेस्पांस देखिये उस नफ़रत का जो उस आदमी ने गोलियां चलाते हुवे ऊगली थी.. सारा विश्व इस वक़्त न्यूज़ीलैंड के साथ है.. ऑस्ट्रेलिया से लेकर अमेरिका सब जगह शोक सभाएं हो रही हैं.. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हिजाब लपेटकर लोगों को गले लगा कर उनको संतावना दे रही हैं.. हज़ारों की तादात में न्यूज़ीलैंड के लोग मस्जिद के बाहर फूल रखकर मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी रहे हैं.. न्यूज़ीलैंड पुलिस की मुखिया अरबी में दुवा कर के रोती है और अपने लोगों से क्षमा मांगती है.. संलग्न वीडियो देखिये.. एक सत्तरह साल का ईसाई नौजावान बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में दक्षिणपंथी समर्थक के सिर पर अंडा फोड़ कर विरोध जताता है… उसका भी वीडियो वायरल हो रहा है.. सिडनी के ओपेरा हाउस की लाइट भी श्रधांजलि दे रही है

मतलब तुम लोगों ने सिर्फ़ व्हाट्सएप्प पर नफ़रत सीखी है मगर तुम ये कभी न समझ पाओगे जो सभ्य समाज और विकसित देशों के लोग समझते हैं.. और यहीं से तुम पांच सौ साल पीछे चले जाते हों बाक़ी यूरोप और दुनिया से

कल से कई मेरी पोस्ट पर आ कर मुझे कटाक्ष मार के ये कह कर गए थे कि भारत मे ज़्यादा दुखी हो तो न्यूज़ईलैंड चले जाओ.. इन गंवार दक्षिणपंथियों को हे लगता है कि अब वहां सब ऐसे ही अल्पसंख्यकों को मारेंगे.. इसीलिए मुझ से कह रहे हैं कि चले जाओ

तो उनके जवाब में मैं कहना चाहूंगा कि, जिस तरह के लोग वहां हैं जिस तरह की समझदारी वहां है, वो देखकर मैं बिल्कुल वहां जाना चाहूंगा.. और मेरी तो ख़ैर आधी ज़िन्दगी यहां कट गई है..मगर पहले भी कह चुका हूँ और फिर ये कहूंगा कि मेरे बच्चे ज़रूर न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया या कहीं ऐसी जगह ही बसेंगे.. और उसका इंतज़ाम मैं कर रहा हूँ.. मैं सुनिश्चित कर के जाऊंगा कि मेरे बच्चे तुम लोगों के बीच से कहीं दूर जा बसें

क्यूंकि इतनी नफ़रत पी चुके हो तुम और दिन रात व्हाट्सएप्प और फ़ेसबुक पर इतनी डोज़ ले रहे हो तुम लोग कि अब इसे शायद ही कोई ठीक कर पाए.. तुम्हारा भविष्य बड़ा अंधकारमय है.. और तुम्हारे इस भविष्य को लेकर मैं बहुत दुखी हूं

ताबिश सिद्दीकी की कलम से…

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