मुजफ्फरनगर दंगों के 12 आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने किया बरी

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नई दिल्ली:  2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगा मामले में कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से पेश किए गए तीन गवाह अपने बयान से पलट गए। जिसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी ने सभा आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती) और 436 (आगजनी) के आरोपों से बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, एसआईटी ने इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। मामले को लंबित रहने के दौरान इनमें से एक अभियुक्त ऋषिदेव की मौत हो गई थी। रिपोर्ट पच्चीस लाख रुपये की संपत्ति लूटने या आगजनी में नुकसान की बात कई गई थी।

मामले में पुलिस ने नरेंद्र उर्फ लाला, काला उर्फ धर्मेंद्र, विजेंद्र, राजेंद्र, अनुज, अमित, ब्रहम, सुरेंद्र उर्फ बाबू, ऋषिदेव, कृष्ण, नीशू, शोकेन्द्र एवं बिटटू उर्फ, अरुण निवासीगण लिसाढ थाना फुगाना के खिलाफ आईपीसी की धारा 395, 436, 295क के तहत आरोपी बनाया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता मोहम्मद सुलेमान समेत तीन गवाह मुकर गए और उन्होंने अभियोजन पक्ष का साथ नहीं दिया। इस मामले में राहत पाने वाले आरोपियों पर इल्जाम था कि 7 सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर जिले के लिसाढ गांव में दंगों के दौरान भीड़ ने कई घरों में आग लगा दी थी और वहां लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया था।

बता दें कि 62 लोग मारे गए और 60 हजार से ज्यादा लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। ये दंगे दो सगे भाइयों शाहिद व नवाब की हत्या के बाद फैले थे। इन दोनों की उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वे खेड़ी तगान से दूध लेने के लिए गांव मथेड़ी जा रहे थे।

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