तेलंगाना: स्पीकर ने कांग्रेस के दो तिहाई विधायकों को TRS का माना, ओवैसी को बड़ा फायदा

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हैदराबाद: लोकसभा चुनाव में 17 में से तीन सीटें जीतकर तेलंगाना में वापसी की कोशिशों में लगी कांग्रेस पार्टी को गुरुवार को तगड़ा झटका लगा। राज्य में पार्टी के 12 विधायकों ने तेलंगाना राष्ट्र समिति का दामन थाम लिया। इन बागी विधायकों के अनुरोध पर तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष पी. श्रीनिवास ने उनके टीआरएस में विलय को अनुमति भी दे दी।

विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस से अलग हुए 12 विधायकों को विधानसभा में टीआरएस विधायकों के साथ सीट का आवंटन भी कर दिया है। इस घटनाक्रम से पहले कांग्रेस तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों में 3 सीटें और इसके एक हफ्ते बाद तीन विधानपरिषद सीटों (एमएमसी) पर जीत दर्ज कर राज्य में कुछ हद तक अपना आधार बढ़ाती नजर आ रही थी।

इन दो तिहाई विधायकों को टीआरएस में शामिल मान लेने पर अबग 119 विधानसभा सदस्यों वाले तेलंगाना में कांग्रेस के पास सिर्फ 6 विधायक बचे हैं। वहीं टीआरएस की सदस्य संख्या बढ़कर 100 हो गई है। उधर, कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि जिस तरह से राज्य में लोगों के जनादेश और नियमों को कुचला जा रहा है, यह दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या है। देश इसे कभी नहीं भूलेगा।

पार्टी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव लोगों के जनादेश के साथ धोखा कर रहे हैं। रेड्डी ने पार्टी नेताओं के साथ विधानसभा के सामने धरना भी दिया। रेड्डी ने कहा, ‘हम लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ेंगे।

औवेसी की पार्टी दूसरे नंबर पर पहुंची 

कांग्रेस के 12 विधायकों के पाला बदलने के बाद अब असदुद्दीन की पार्टी एमआईएमआईएम सात विधायकों के साथ विधानसभा में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। कांग्रेस के अब मात्र छह विधायक ही बचे हैं। माना जा रहा है कि आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद टीआरएस विधानसभा अध्‍यक्ष से अनुरोध करेगी कि कांग्रेस पार्टी के विधायक मल्‍लू भट्टी विक्रमार्का को नेता विरोधी दल के पद से हटाया जाए। 1958 के बाद ऐसा पहली बार है जब विधानसभा में एमआईएमआईएम दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है।

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