ध्रुव गुप्त : श’हीद अब्दुल हमीद का स्मारक और वह रात….

0
287

आज भारतीय सेना के गौरव शहीद अब्दुल हमीद की यौमे पैदाईश है। जब भी यह दिन आता है, मेरे दिलोदिमाग में उन्नीस साल पहले की एक भयानक रात की स्मृतियां कौंध जाती हैं। उस समय मैं मुंगेर जिले का एस.पी हुआ करता था। एक दिन आधी रात को कुछ लोगों ने फोन पर बताया कि मुंगेर शहर के नीलम सिनेमा चौक पर सांप्रदायिक दंगे की स्थितियां बन गई हैं।

सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील माने जाने वाले उस चौक की स्थिति ऐसी थी कि सड़क के एक तरफ मुसलमानों के मुहल्ले थे और दूसरी ओर हिंदुओं के। थाने को खबर करने के बाद मैं चौक पर पहुंचा तो देखा कि एक तरफ सैकड़ों मुसलमान जमा थे और दूसरी तरफ सैकड़ों हिन्दू। दोनों तरफ से उत्तेजक नारे लग रहे थे। बीच-बीच में पटाखों भी छूट रहे थे।

मेरे लिए सुविधाजनक स्थिति यह थी कि इस शहर और जिले के लोग मेरा बहुत सम्मान करते थे। मैं लोगों के मना करने के बावज़ूद मुस्लिम मोहल्ले में घुस गया। मुझे देखकर दर्जनों युवा मेरे पास आ गए। तनाव की वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि वे चौक पर शहीद अब्दुल हमीद के स्मारक की नींव रख रहे थे कि कुछ ही देर बाद उसे तोड़ने के लिए सैकड़ों हिन्दू जमा हो गए।

मैंने पूछा – ‘क्या तुम लोगों ने स्मारक बनाने के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी ? क्या स्मारक की नींव तोड़ने पहुंचे लोगों को यह पता था कि तुमलोग किसका स्मारक बनाने की तैयारी कर रहे थे ?’ मेरे सवालों पर सभी लोग बगले झांकने लगे। मैं समझ गया। मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि चौक पर शहीद का स्मारक बनेगा और सबके सहयोग से बनेगा। मेरी बात पर भरोसा हो तो आप सभी लोग घर चले जाओ। मैं खुद रात भर जगकर स्मारक की हिफाज़त करूंगा। कुछ ही देर में सभी मुस्लिम घर चले गए। पटाखों की आवाज़ें इधर बंद हुई, मगर हिन्दुओं की तरफ अभी भी आतिशबाज़ी हो रही थी।

मैं हिंदुओं की तरफ गया तो लोगों ने बताया कि उन्हें पता चला था कि मुसलमान शहर के व्यस्त चौराहे पर किसी हमीद नाम के आदमी का स्मारक बना रहे हैं तो वे विरोध करने पहुंच गए। मैंने शहीद अब्दुल हमीद का नाम बताते हुए वस्तुस्थिति से अवगत कराया तो उनके चेहरों से गुस्सा काफ़ूर हो गया। मैंने उन्हें बताया कि सिर्फ संवादहीनता और ग़लतफ़हमी की वजह से ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बनी है। अब्दुल हमीद का नाम सुनकर कुछ ही देर में इधर से भी आतिशबाज़ी बंद हो गई और लोग लौट गए।

मैं अखबार बिछाकर प्रस्तावित स्मारक पर बैठ गयाऔर और शहीद को याद कर कहा – माफ़ करना हमारे आज़ाद भारत के अभिमन्यु, वे लोग नहीं जानते कि तुम्हारे नाम पर वे क्या करने जा रहे थे ! आज मुंगेर के नीलम सिनेमा चौक पर सबके सहयोग से बना शहीद अब्दुल हमीद का स्मारक शान से खड़ा है जिसपर सभी संप्रदायों के लोग पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

पूर्व आईपीएस अधिकारी ध्रुव गुप्त की कलम से…

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें