मालेगांव: मॉब लिंचिंग के खिलाफ लाखों मुसलमानों का प्रदर्शन, एंटी मॉब लिंचिंग कानून की मांग

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झारखंड में भीड़ द्वारा हुई तबरेज अंसारी की ह’त्या के बाद देश भर में विरोध-प्रदर्शन जारी है। सोमवार मालेगांव स्थित ‘शहीदों की यादगार’ (शहीदों का स्मारक) पर मुस्लिम समुदाय के कम से कम 1 लाख लोग इकट्ठे हुए। लाखों की इस भीड़ ने मॉब लिचिंग के खिलाफ कानून बनाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि झारखंड में हुई तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग की घटना फाइनल ट्रिगर है। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई जमीयत उलेमा के मौलवियों ने की। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला और सरकार से इस मसले पर एक हफ्ते में कोई कदम उठाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ‘हम बदला नहीं चाहते और ना ही हिंसा में विश्वास करते हैं। हमें कानून के राज में विश्वास है।’

इस रैली के दौरान कवि फैयाज के शब्दों को बोला गया कि -“आज अगर निशाने में हम हैं, तो दूसरे लोगों को खुश नहीं होना चाहिए।” मालेगांव स्थित ‘शहीदों की यादगार’ वही ऐतिहासिक जगह है जहां अंग्रेजों ने 97 साल पहले 7 स्वतंत्रता सेनानियों (फ्रीडम फाइटर) को फांसी पर लटका दिया था।

बता दें कि बीते दिनों झारखंड में तबरेज अंसारी नामक युवक की चोरी के शक में भीड़ ने बुरी तरह से पिटाई कर दी थी। जिसकी बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था। इस घटना के विरोध में ही देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे हैं।

मृतक तबरेज की पत्नी ने बताया कि 17 जून की रात उसका शौहर तबरेज अंसारी (24) जमशेदपुर से गांव वापस लौट रहे थे, तभी धातकीडीह गांव में कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। चोरी का आरोप लगाकर रातभर उन्हें बिजली के पोल से बांध कर रखा। उससे बहुत मारपीट की गई और जय श्री राम व जय हनुमान बोलने के लिए कहा। नारा लगाने पर भी भीड़ उन्हें पीटती रही। रात भर खंभे से बांधकर पीटा और सुबह होने पर उन्हें सरायकेला थाने की पुलिस को सौंप दिया। जहां उनकी मौत हो गई।

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