प्रवासी मजदूरों का दुख-दर्द समझे मोदी सरकार: मौलाना उमर कासमी

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मौलाना उमर कासमी मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ जी के साथ

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस के सचिव मौलाना उमर कासमी ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बिना सोचे समझे लॉक डाउन के फैसले की सज़ा तो पुरे देश को ही भुगतनी ही पड़ रही है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। जो बड़ी तादाद में महानगरों में फंसे है।

मौलाना कासमी ने कहा कि गुजरात के सूरत में, मुंबई के बांद्रा में या दिल्ली के आनंद विहार में जिस तरह बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घरों को जाने के लिए सामने आए है। स्पष्ट करता है कि प्रवासी मजदूर जैसे-तैसे अपने घरो को लौटना चाहते है।

उन्होने बताया कि इन लोगों को 14 अप्रेल के दिन घर लोटने के लिए लॉक डाउन के हटने के बेसब्री से इंतजार था। लेकिन लॉक डाउन हटा तो नहीं बल्कि इसे 3 मई तक बढ़ा दिया गया। उन्होने कहा कि रेलवे ने देश भर में पहले ही लाखों टिकट बूक कर रखे थे। कई मीडिया रिपोर्ट में 14 अप्रेल के बाद ट्रेन चलने का भी दावा किया गया था। परिणामस्वरूप देश के कई हिस्सों में प्रवासी मजदूरों ने 14 अप्रेल को रेलवे स्टेशनों का रुख किया। हालांकि आखिरी वक्त में रेलवे ने टिकट केंसिल करने और ट्रेनों को चलाए जाने को लेकर सफाई पेश की।

कासमी ने कहा कि पीएम मोदी ने इस बार भी बिना किसी तैयारी के लॉकडाउन-2.0 की घोषणा की। पीएमओ का रेलवे के साथ कोई तालमेल नजर नहीं आया। कासमी ने कहा कि ऐसा ही चलता रहा तो लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों को निकल सकते है। उन्होने कहा, मोदी सरकार को प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, पुरे देश को लॉक डाउन करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होने कहा, कोरोना प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर लॉकडाउन को हटाया जाए। प्रवासी मज़दूरो को उनके राज्यों तक पहुँचाने और उन्हे क्वारंटाइन में रखे जाने की व्यवस्था की जाए।

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