उदयपुर, 16 अप्रैल। पाक माह रमजान में हर किसी के दिल को छू देने वाली खबर सामने आई है। राजस्थान के उदयपुर में रोजेदार ने जो फैसला किया, उससे दो महिलाओं की जान बच गई।

दरअसल, शहर के पेसिफिक हॉस्पिटल में चार दिन से भर्ती छोटी सादड़ी निवासी 36 वर्षीय निर्मला और दो दिन से भर्ती ऋषभदेव निवासी 30 वर्षीय अलका की तबीयत ज्यादा खरा’ब हो गई। दोनों महिलाओं को ऑक्सीजन पर रखा हुआ था। दोनों का ब्ल’ड ग्रुप ए-पॉजिटिव था। दोनों को प्ला’ज्मा की जरूरत पड़ी।

डॉक्टरों ने तुरंत व्यवस्था करने को कहा, लेकिन कहीं से बंदोबस्त नहीं हो पा रहा था। इस बीच रक्त युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं तक सूचना पहुंची। वे भी प्लाज्मा की तलाश में जुटे तो अकील मंसूरी याद आए, क्योंकि वे 17 बार रक्तदान कर चुके थे और पता था कि उनका ब्ल’ड ग्रुप भी ए पॉजिटिव है। दोनों महिलाओं को कोई ए पॉजिटिव ही प्लाज्मा दे सकता था। वाहिनी के अर्पित कोठारी ने उनसे प्लाज्मा देने के लिए निवेदन किया। अकील ने रोजा रखा हुआ था। वे प्लाज्मा डोनेट करने पहुंच गए, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि खाली पेट प्लाज्मा नहीं ले सकते।

अकील ने पहला रोजा तो’ड़ना तय किया और अल्लाह का शुक्रिया करते हुए कहा कि उनका जीवन किसी का जीवन ब’चाने के काम आ रहा है, इससे बड़ा क्या धर्म होगा। उन्होंने इसके बाद नाश्ता किया, फिर डॉक्टरों ने उनका एंटी बॉडी टेस्ट किया और प्लाज्मा लिया। ये दाेनाें महिलाओं काे चढ़ाया गया। अकील ने तीसरी बार प्लाज्मा डोनेट किया।