इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान के बाद शव्वाल के बाद चांद दिखने के बाद को ईद-उल-फितर त्योहार मानाया जाता है। भारत में सउदी अरब के चांद दिखने के दूसरे दिन बाद ही ईद मनाई जाती है। कल मंगलवार को सउदी अरब में लोग चांद का दीदार करते रह गए, लेकिन चांद का दीदार न हो पाया। इसलिए वहां 13 मई को ईद मनाई जाएगी।

रमजान रमजान के पाक महीने की शुरुआत चांद के देखने से होता है और ये चांद के निकलने से खत्म होता है। रमजान के 29 या 30 दिनों के बाद ईद का चांद दिखता है। 13 मई को रमजान के 30 रोजे खत्म हो रहे हैं। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन लोग सुबह नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं।

यह अल्लाह के ईनाम का दिन होता है। यह मिठाइयां बांटने और खाने-खिलाने का दिन होता है। हर मुसलमान ईद की नमाज से पहले या ईद की नमाज के बाद फितरा गरीबों को देता है। तकरीबन पचास या सौ रुपए अपने परिवार के हर आदमी की तरफ से गरीबों को दिया जाता है । यह वाजिब है । इसको सदका फितर कहा जाता है और यह वाजिब है। वाजिब का मतलब यह जरूरी है। इतना कम से कम देना जरूरी है। इसका मतलब गरीबों को अपनी ईद में शामिल करना है